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अल्लाह के बंदों तक दीन का पैगाम पहुंचाना और उन्हें अल्लाह से जोड़़ना ओलिया-ए-किराम का असल मिशन:अ़ल्लामा पीर सय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी


आचाराणियों की ढाणी,उंद्रोड़ में हज़रत मख्दूम नूह सरवर अ़लैहिर्रहमा की याद में "जल्सा-ए-सरवरी” मनाया गया।

(उंद्रोड़,बाड़मेर,राजस्थान) 31/मई 2022 ईस्वी मंगलवार को जुम्ला मुसलमानाने अहले सुन्नत बिलखुसूस "सरवरी जमाअ़त” आचाराणियों की ढाणी,उंद्रोड़ की जानिब से हज़रत मख्दूम शाह लुत्फुल्लाह अल मअ़रूफ हज़रत मख्दूम नूह सरवर हालाई अ़लैहिर्रहमा की याद में "जल्सा-ए- सरवरी” इन्तिहाई अ़क़ीदत व एहतिराम के साथ मनाया गया-
इस जल्से की शुरूआ़त तिलावते कलामे रब्बानी से की गई, बादहू दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा के कुछ होनहार तल्बा ने यके बाद दीगरे लोगों के सामने नअ़त व मन्क़बत और दीनी व इस्लाही मौज़ूअ़ पर तक़ारीर पेश कीं,लोगों ने बच्चों की दाद व दहिश के ज़रिया खूब हौसला अफज़ाई की, जब कि खुसूसी नअ़त ख्वाँ की हैषियत से वासिफे शाहे हुदा हज़रत क़ारी अ़ताउर्रहमान साहब क़ादरी अनवारी जोधपुर ने भी नअ़त व मन्क़बत ख्वानी का शर्फ हासिल किया।

फिर रीवड़ी बाड़मेर से तशरीफ लाए हज़रत मौलाना अल्हाज मुहम्मद पठान साहब सिकन्दरी ने "नमाज़ और औलिया-ए-किराम की तअ़लीमात” के उ़न्वान पर बहुत ही नासिहाना और उ़म्दा खिताब किया।

आखिर में इस जलसे के खुसूसी खतीब व सरपरस्त नूरुल उ़़ल्मा पीरे तरीक़त रहबरे राहे शरीअ़त हज़रत अ़ल्लामा अल्हाज सय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी मुहतमिम व शैखुल हदीष:दारुल उ़़लूम अनवारे मुस्तफा व सज्जादा नशीन:खानक़ाहे आ़लिया बुखारिया सेहलाऊ शरीफ ने कम वक़्तों मे इन्तिहाई जामेअ़, नसीहतों से पुर और दुआ़ईया कलिमात से नवाज़ा।
आप ने अपने खिताब में फरमाया कि "बिला शुब्हा किसी भी बुज़ुर्ग की याद मनाने और उन की रुह को ईसाले षवाब व बुलंदी-ए-दरजात की दुआ़ करने के लिए उन के मुहिब्बीन [चाहने वालों] व मुरीदीन और मुअ़तक़िदीन वग़ैरह का उन के नाम की जानिब निस्बत करते हुए नेक मज्लिसों का इन्इक़ाद करना व सजाना और एैसी मज्लिसों में ज़िक्रुल्लाह,नअ़्त ख्वानी और क़ुरआने पाक की तिलावत, उ़ल्मा-ए-दीन के ज़रिया वअ़ज़ व नसीहत और अल्लाह व रसूल के अहकाम व फरमूदात और बुज़ुर्गाने दीन के हालात व खिदमात पर मुश्तमिल बयानात और इस के एलावा दोसरे नेक काम कर के उन को जो ईसाले षवाब किया जाता है वोह जाइज़ व मुस्तहसन है…क्यो कि इस तरह से बुज़ुर्गाने दीन की याद गीरी करने का असल मक़्सद उन को ईसाले षवाब करने के साथ एैसी नेक मज्लिसों के ज़रिया लोगों तक अल्लाह व रसूल और बुज़ुर्गाने दीन के पैग़ामात को लोगों तक पहुंचाना और लोगों को दीन व शरीअ़त के क़रीब करना,और लोगों के अंदर दीनी जज़्बा बेदार करना होता है।
आप ने अपने खिताब के दौरान क़ौम को मुखातब कर के इख्तिसार के साथ हज़रत मख्दूम नूह सरवर हालाई अ़लैहिर्रहमा के हालाते ज़िंदगी को भी कुछ इस तरह बयान फरमाया कि "आप हज़रात ने जिस बुज़ुर्ग की याद में इस महफिल का इन्इक़ाद किया है वोह हज़रत मख्दूम नूह सरवर हालाई अ़लैहिर्रहमा हैं,जिन का शुमार बिला शुब्हा सरज़मीने सिंध के मशहूर व मअरूफ और बुज़ुर्ग सूफिया में होता है-
आप का नामे नामी इस्मे ग्रामी शाह लुत्फुल्लाह और लक़ब मख्दूम नूह सरवर और वालिदे ग्रामी का नाम हज़रत नेअ़मतुल्लाह शाह है-आप का सिलसिला-ए-नसब हज़रत अबू बकर सिद्दीक़ रदियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु से जा मिलता है-आप के जद्दे आला शैख अबू बकर बूबक ज़िला दादू के मक़ाम पर आबाद हुए-
हज़रत मख्दूम नूह सरवर अ़लैहिर्रहमा की विलादते बा सआ़दत[पैदाइश] 27 रमज़ानुल मुबारक 911 हिजरी बरोज़ जुम्आ़ मुबारका सूबा-ए-सिंध के मौजूदा मटियारी ज़िला के शहर व तअ़ल्लुक़ा [तहसील] हाला में हुई-
अल्लाह तआ़ला ने आप को इल्मे लदुन्नी से मालामाल फरमाया था,आप का शुमार सिंध के सरकरदा औलिया-ए-किराम में होता है-आप हर शख्स से उस के हस्बे हाल गुफ्तगू फरमाते और बर महल व बरजस्ता क़ुरआनी आयतों से इस्तिदलाल फरमाते-क़ुरआन मजीद के मआ़नी व मतालिब [तौज़ीह व तशरीह] इस अंदाज़ से बयान फरमाते कि बड़े बड़े उ़़ल्मा भी दम ब खुद [हैरान] रह जाते-बुज़ुर्गाने दीन के हालात और उन से मुतअ़ल्लिक़ बातों का ज़िक्र एैसे पुर ताषीर अंदाज़ में करते कि सामईन को रुजूअ़ इलल्लाह की दौलत हासिल हो जाती-
आप की करामतैं बचपन से ही ज़ाहिर होने लगीं थीं जिन से आप का मादर ज़ाद [पैदाइशी] वली होना षाबित हो गया था,…बुज़ुर्गों से मन्क़ूल है कि पैदाइश के सातवीं दिन क़रीब की मस्जिद से अज़ान की आवाज़ आई, उस वक्त आप झूले में आराम कर रहे थे, जब अज़ान खतम हुई तो आप ने फसीह व बलीग़ अ़रबी ज़बान में कहा نعم لااله الاالله ولا نعبد الااياه مخلصين له الدين
ऐक मरतबा हुज़ूर ग़ौषे पाक रदियल्लाहु तआ़ला अ़न्हु की औलाद में से ऐक बुज़ुर्ग आप के पास आए और कहा कि मैं आप को इजाज़त व खिलाफत देने और फाइदा पहुंचाने के लिए आया हूं, और मैं इल्मे कीमिया भी जानता हूं अगर आप कहें तो आप को इल्मे कीमिया भी सिखा सकता हूं, जो शायद किसी वक़्त आप के काम आए-आप ने जवाब में फरमाया: कि जिस दिन से मैं बारगाहे नबवी से मुशर्रफ हुवा हूं दुनिया की हविस दिल से निकल गई है,यह कह कर आप ने ऐक दिरहम मंगवाया और उस पर मिट्टी मल दी तो वह बिलकुल खरा सोना बन गया”-
हज़रत मख्दूम नूह सरवर अ़लैहिर्हमा का विसाल 87 साल की उ़म्र में 27 ज़ुलक़अ़दा 988 हिजरी ब मुताबिक़ 02 जनवरी 1581 ईस्वी को हुवा-

अब्रे रहमत उन की मरक़द पर गोहर बारी करे।
हश्र तक शाने करीमी नाज़ बरदारी करे।

आप का मज़ारे पुर अनवार हाला शरीफ में ज़ियारत गाहे आ़म व खास है।
हज़रत मख्दूम नूह सरवर अ़लैहिर्हमा की हयात व खिदमात पर इस तरह बिल इख्तिसार रोशनी डालते हुए आप ने सभी शुरका-ए-जल्सा को मुखातब कर के फरमाया कि "दुनिया में जितने भी अल्लाह के नेक बंदे या औलियाअल्लाह गुज़रे हैं उन का असल मिशन और मक़सद अल्लाह के बंदों को अल्लाह से जोड़ना,दीन और शरीअ़ते इस्लामिया पर लोगों को कारबंद होने की ताकीद व तल्क़ीन करना ही रहा है-इस लिए हम सभी लोगों को चाहिए कि हम बुज़ुर्गाने दीन की तअ़लीमात पर अ़मल पैरा हों,यही बुज़ुर्गाने दीन के नामों से मज्लिसों के इन्इक़ाद का असल मक़्सद व हदफ है”-
इस दीनी प्रोग्राम में खुसूसियत के साथ यह हज़रात शरीक हुए।
★हज़रत मौलाना मुहम्मद शमीम अहमद साहब नूरी मिस्बाही नाज़िमे तअ़लीमात:दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा सेहलाऊ शरीफ,☆हज़रत मौलाना बाक़िर हुसैन साहब क़ादरी बरकाती अनवारी,★मौलाना अ़ताउर्हमान साहब क़ादरी अनवारी नाज़िमे आला मदरसा क़ादरिया फैज़े जीलानी मेकरन वाला,★मौलाना फिरोज़ रज़ा साहब रतनपुरी आचारियों की ढाणी,☆मौलाना मुहम्मद हमज़ा क़ादरी अनवारी सोलंकिया,★क़ारी अरबाब अ़ली क़ादरी अनवारी, ☆मौलाना मुहम्मद उ़र्स सिकन्दरी, ★मौलाना फतेह मुहम्मद साहब सरपंच,☆मौलाना निहालुद्दीन साहब अनवारी आसाड़ी,★मास्टर शेर मुहम्मद खान साहब☆जनाब मुहम्मद उ़र्स खान,★जनाब अ:लतीफ खान,☆जनाब मुहम्मद अमीन खान,★जनाब जमाल खान,☆जनाब ग़ुलाम खान,☆जनाब वरियाम खान वग़ैरहुम।

सलातो सलाम और नूरुल उ़ल्मा हज़रत अ़ल्लामा अल्हाज पीर सय्यद नूरुल्लाह शाह बुखारी की दुआ़ पर यह जल्सा समाप्त हुवा।

रिपोर्टर:(मौलाना)हबीबुल्लाह क़ादरी अनवारी।
आफिस इंचार्ज:दारुल उ़लूम अनवारे मुस्तफा दरगाह हज़रत पीर सय्यद हाजी आ़ली शाह बुखारी,पच्छमाई नगर,सेहलाऊ शरीफ,पो:गरडिया [तह:रामसर] ज़िला:बाड़मेर [राज:]

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